Philipp Marx

Philipp Marx

Philipp Marx

RattleStork के संस्थापक

Philipp Marx RattleStork के संस्थापक और पूर्व अंतरराष्ट्रीय शुक्राणु दाता हैं। वे अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर शुक्राणु दान और सह-अभिभावकत्व के बारे में लिखते हैं।

RattleStork की स्थापना से पहले Philipp ने कई देशों में शुक्राणु दान किया था। इस अनुभव ने उन्हें दिखाया कि दाता की मदद से गर्भधारण, भरोसे, व्यक्तिगत सीमाओं और सह-अभिभावकत्व को लेकर लोगों के नज़रिए कितने अलग हो सकते हैं।

उनके लेख सार्वजनिक स्रोतों और व्यावहारिक जानकारी को व्यवस्थित करते हैं; वे चिकित्सा या कानूनी सलाह का विकल्प नहीं हैं।

इस लेखक के लेख

कुल प्रकाशित लेख:220

मुस्कुराता हुआ पुरुष घर पर इनसीमिनेशन के लिए लेबल लगा नमूना कंटेनर पकड़े हुए

भारत में घर पर इनसीमिनेशन: समय, तरीका और सुरक्षा

घर पर इनसीमिनेशन या घरेलू गर्भाधान आम तौर पर यह है कि वीर्य को साफ तरीके से इकट्ठा करके बिना सुई वाले उपकरण से योनि में रखा जाए, आदर्श रूप से फर्टाइल विंडो के भीतर।
शुक्राणु कितने समय तक जीवित रहते हैं? शरीर के अंदर और बाहर की वास्तविक समय-सीमाएँ

शुक्राणु कितने समय तक जीवित रहते हैं? शरीर के अंदर और बाहर की वास्तविक समय-सीमाएँ

यह सवाल बहुत तरह से पूछा जाता है: शुक्राणु महिला शरीर में कितने दिन तक रहते हैं, शरीर के बाहर कितनी देर जीवित रहते हैं, क्या पानी या हवा में तुरंत मर जाते हैं, और क्या वे 7 दिन तक टिक सकते हैं?
Blue Balls (वीर्य रुकावट दर्द): अंडकोष में दर्द क्यों होता है और क्या करें?

Blue Balls (वीर्य रुकावट दर्द): अंडकोष में दर्द क्यों होता है और क्या करें?

Blue Balls या जिसे कई लोग “अंडकोष में दर्द” या “वीर्य रुकावट दर्द” कहते हैं, यह एक सामान्य स्थिति है जिसमें यौन उत्तेजना के बाद अंडकोषों में भारीपन, दबाव या दर्द महसूस होता है, जब स्खलन (ejaculation) नहीं होता। क्या यह खतरनाक है?
एग डोनेशन: प्रक्रिया, लागत, सफलता की संभावना, जोखिम और भारत का कानूनी ढांचा

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एग डोनेशन कुछ लोगों के लिए गर्भधारण का सबसे वास्तविक रास्ता बन जाता है, लेकिन भारत के संदर्भ में यह केवल मेडिकल फैसला नहीं है।
स्पर्म क्रैम्प्स - इंटरनेट का एक मिथक, चिकित्सा आधार नहीं

स्पर्म क्रैम्प्स - इंटरनेट का एक मिथक, चिकित्सा आधार नहीं

“स्पर्म क्रैम्प्स” सुनने में तकनीकी लगता है, पर यह कोई चिकित्सा शब्द नहीं है। यह न तो वर्गीकरणों में मिलता है, न क्लिनिकल गाइडलाइनों में। आमतौर पर लोग इससे तात्पर्य स्खलन के दौरान या बाद में होने वाले दर्द से रखते हैं - जो वास्तविक समस्या है और “दर्दयुक्त स्खलन” (डिसऑर्गाज़्मिया) जैसे स्थापित शब्दों में स्पष्ट रूप से वर्णित है। कारण, जाँच और उपचार का संक्षेप एक मुक्त-सुलभ समीक्षा में उपलब्ध है: NCBI/PMC review ।
स्पर्मियोग्राम (semen analysis): प्रक्रिया, तैयारी, रिपोर्ट समझना और अगले कदम

स्पर्मियोग्राम (semen analysis): प्रक्रिया, तैयारी, रिपोर्ट समझना और अगले कदम

स्पर्मियोग्राम एक semen sample का standardised lab analysis है और पुरुष कारणों से fertility issue की शंका होने पर अक्सर पहला टेस्ट होता है। यहाँ आपको एक practical step-by-step गाइड मिलेगा: sample सही तरीके से कैसे देना है, रिपोर्ट को समझदारी से कैसे पढ़ना है और अगर values असामान्य हों तो आम तौर पर आगे क्या किया जाता है।
प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग: प्रक्रिया, उपयोग और सीमाएँ

प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग: प्रक्रिया, उपयोग और सीमाएँ

प्रीइम्प्लांटेशन जेनेटिक टेस्टिंग से कुछ गंभीर वंशानुगत बीमारियों के बढ़े हुए जोखिम वाले लोगों को भ्रूण स्थानांतरण से पहले आनुवंशिक जाँच का विकल्प मिलता है।
इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन: प्रक्रिया, समय-रेखा, सफलता दर और लागत आसान भाषा में

इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन: प्रक्रिया, समय-रेखा, सफलता दर और लागत आसान भाषा में

इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन, जिसे अक्सर IVF कहा जाता है, बांझपन उपचार की एक चिकित्सकीय रूप से संचालित प्रक्रिया है जिसमें चरण स्पष्ट होते हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण फैसले भी लेने पड़ते हैं: प्रोटोकॉल का चुनाव, समय-निर्धारण, ट्रांसफर की रणनीति, सुरक्षा प्रबंधन और बजट।
इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन: ICSI की प्रक्रिया, कब ज़रूरी है, सफलता के कारक, जोखिम और लागत सरल भाषा में

इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन: ICSI की प्रक्रिया, कब ज़रूरी है, सफलता के कारक, जोखिम और लागत सरल भाषा में

इंट्रासाइटोप्लाज़्मिक स्पर्म इंजेक्शन, जिसे आम तौर पर ICSI कहा जाता है, इन विट्रो फ़र्टिलाइज़ेशन का एक विशेष रूप है जिसे मुख्यतः गंभीर पुरुष-कारक बांझपन को पार करने के लिए विकसित किया गया था।
इंट्रासर्विकल इनसेमिनेशन: आईसीआई प्रक्रिया, समय, सफलता की संभावना, सुरक्षा, लागत और आईयूआई, आईवीएफ और आईसीएसआई से अंतर

इंट्रासर्विकल इनसेमिनेशन: आईसीआई प्रक्रिया, समय, सफलता की संभावना, सुरक्षा, लागत और आईयूआई, आईवीएफ और आईसीएसआई से अंतर

इंट्रासर्विकल इनसेमिनेशन, या संक्षेप में आईसीआई, कृत्रिम गर्भाधान का एक रूप है जिसमें वीर्य का नमूना गर्भाशय ग्रीवा के करीब रखा जाता है और निषेचन शरीर के भीतर ही होता रहता है।
कृत्रिम गर्भाधान (भारत) 2025: विधियाँ, सफलता की संभावना और लागत

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“कृत्रिम गर्भाधान” एक अकेली प्रक्रिया नहीं, बल्कि तकनीकों का टूलबॉक्स है। कारण, उम्र और पूर्व-इतिहास के अनुसार अलग-अलग रास्ते उपयुक्त हो सकते हैं - घर पर की जाने वाली इंसैमिनेशन (ICI/IVI) से लेकर प्रयोगशाला-आधारित IVF/ICSI तक। यह अवलोकन विधियों को व्यवस्थित करता है, चरण, सफलता-दर, जोखिम और लागत समझाता है तथा आगे पढ़ने के लिंक देता है। WHO के इन्फर्टिलिटी फैक्टशीट के अनुसार 12 महीनों तक गर्भ न ठहरे (या ≥35 वर्ष पर 6 महीनों में) तो चिकित्सकीय जाँच करानी चाहिए।
कॉर्पस ल्यूटियम की कमजोरी: कारण, लक्षण और प्रमाण-आधारित उपचार

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कॉर्पस ल्यूटियम की कमजोरी का मतलब है कि चक्र के दूसरे हिस्से में प्रोजेस्टेरोन का असर कम होता है या पर्याप्त समय तक नहीं रहता; मेडिकल भाषा में इसे अक्सर ल्यूटियल फेज़ की कमी कहा जाता है। इस लेख में आप जानेंगे कि सामान्य लक्षण क्या होते हैं, जांच को कैसे समझदारी से किया जाए और कारण के अनुसार कौन से उपचार वाकई प्रमाणों पर आधारित हैं।
LH बढ़ना और ओव्यूलेशन टेस्ट: उपजाऊ दिन भरोसेमंद तरीके से पहचानें

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LH का बढ़ना ओव्यूलेशन के आसपास एक महत्वपूर्ण टाइमिंग-सिग्नल है और यह आपको उपजाऊ दिनों की योजना अधिक वास्तविक रूप से बनाने में मदद कर सकता है।