सरोगेसी उन लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प हो सकता है, जिनके लिए प्राकृतिक या अन्य प्रजनन विधियों से अपना इच्छित संतान प्राप्त करना कठिन हो रहा है। भारत में सरोगेसी को पहले वाणिज्यिक रूप से व्यापक रूप में अपनाया गया था, लेकिन अब कानूनी रूप से इसके नियम बहुत सख्त हैं। इस लेख में हम भारत में सरोगेसी के विभिन्न रूपों, कानूनी परिदृश्य, अंतर्राष्ट्रीय विकल्पों, खर्च, चिकित्सा पहलुओं और वैकल्पिक परिवार निर्माण के तरीकों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
सरोगेसी क्या है?
सरोगेसी का मतलब है कि एक महिला (सरोगेट माँ) किसी अन्य व्यक्ति या जोड़े के लिए गर्भ धारण करती है और बच्चे के जन्म के बाद उसे इच्छुक माता-पिता को सौंप देती है। यह प्रक्रिया विवाहित और अविवाहित, समलैंगिक जोड़ों या एकल व्यक्तियों के लिए अपनाई जा सकती है, जिन्हें जैविक या आनुवंशिक कारकों के कारण अपने संतान के प्राकृतिक मार्ग से माता-पिता बनने में दिक्कत होती है।
पारंपरिक बनाम गर्भाधान-आधारित सरोगेसी
पारंपरिक सरोगेसी: इस मॉडल में सरोगेट माँ अपनी स्वयं की अंडाणु प्रदान करती है, जिससे उसका आनुवंशिक संबंध बच्चे से जुड़ा रहता है। यह तरीका कानूनी और भावनात्मक दृष्टिकोण से जटिल परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है।
गर्भाधान-आधारित सरोगेसी: इस मॉडल में निषेचित अंडाणु – जो इच्छुक माता-पिता या दाता के अंडाणु एवं शुक्राणु से तैयार होते हैं – को सरोगेट माँ के गर्भ में स्थानांतरित किया जाता है। इस स्थिति में सरोगेट माँ का बच्चे से कोई आनुवंशिक संबंध नहीं होता, जिससे कानूनी स्पष्टता बनी रहती है।
सरोगेसी एजेंसियाँ: मध्यस्थता और देखभाल
सरोगेसी प्रक्रिया में एजेंसियाँ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये एजेंसियाँ इच्छुक माता-पिता और सरोगेट माँ दोनों को निम्नलिखित सेवाएं प्रदान करती हैं:
- योग्य सरोगेट माँ की खोज और चयन (मैचिंग)
- कानूनी परामर्श और अनुबंध तैयार करना
- चिकित्सा जांच, आईवीएफ और अन्य प्रजनन प्रक्रियाओं का समन्वय
- मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन के लिए सलाह
एक विश्वसनीय एजेंसी पूरी प्रक्रिया की कानूनी, चिकित्सा और वित्तीय जानकारी प्रदान करती है, जिससे सभी पक्षों को सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
भारत में सरोगेसी: कानूनी स्थिति
भारत में सरोगेसी का कानूनी परिदृश्य पिछले कुछ वर्षों में काफी बदल चुका है। भारतीय सरोगेसी (नियमन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत अब सिर्फ भारतीय नागरिकों के लिए मात्र पारस्परिक और अनाल्ट्रुइस्टिक (निस्वार्थ) सरोगेसी की अनुमति है। विदेशी नागरिकों, पुरुष जोड़ों और स्वतंत्र व्यक्तियों के लिए वाणिज्यिक सरोगेसी पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दी गई है।
इसके अलावा, कानून के अनुसार, सरोगेट माँ को गर्भ धारण करने से पहले और दौरान व्यापक चिकित्सा, मनोवैज्ञानिक और कानूनी परामर्श लेना अनिवार्य है। सरोगेसी अनुबंधों को सरकार द्वारा पंजीकृत एजेंसियों के माध्यम से ही मान्यता दी जाती है, ताकि किसी भी प्रकार के शोषण या कानूनी विवाद से बचा जा सके।
सरोगेसी की लागत और वित्तपोषण
भारतीय संदर्भ में, सरोगेसी की कुल लागत में कई घटक शामिल होते हैं:
- चिकित्सा प्रक्रियाएँ (आईवीएफ, गर्भधारण परीक्षण, प्रसूति) और अस्पताल की फीस
- कानूनी परामर्श, अनुबंध पंजीकरण और अन्य न्यायिक खर्च
- सरोगेट माँ के लिए चिकित्सा देखभाल, वसूली, और बीमा
- एजेंसी फीस और अन्य सेवा शुल्क
हालाँकि, पारंपरिक वाणिज्यिक सरोगेसी भारत में अब प्रतिबंधित है, लेकिन यदि सभी पात्र शर्तें पूरी हों तो कुल खर्च आमतौर पर अपेक्षाकृत किफायती रहता है। वित्तपोषण के विकल्प में लोन, किस्तों में भुगतान या अन्य क्रेडिट विकल्प शामिल हो सकते हैं। दीर्घकालिक योजना और आपातकालीन खर्चों के लिए अतिरिक्त बजट बनाना आवश्यक है।
चिकित्सा पहलू और जोखिम
सरोगेसी एक जटिल चिकित्सा प्रक्रिया है, जो प्रायः इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) पर आधारित होती है। इसमें इच्छुक माता-पिता या दाताओं के अंडाणु और शुक्राणुओं को लैब में निषेचित कर तैयार भ्रूण को सरोगेट माँ के गर्भ में स्थानांतरित किया जाता है।
संभावित जोखिम:
- हार्मोनल थेरेपी से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी प्रभाव
- गर्भावस्था संबंधी जटिलताएँ (जैसे कि बहु गर्भावस्था, समय से पूर्व प्रसव)
- सरोगेट माँ के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला दबाव
नियमित चिकित्सकीय जांच – जैसे कि अल्ट्रासाउंड, रक्त जांच और विशेषज्ञों से परामर्श – अनिवार्य है, जिससे संभावित जोखिमों का समय रहते पता चल सके और उपयुक्त सावधानियाँ बरती जा सकें।
नैतिक विमर्श और आलोचनाएँ
सरोगेसी को लेकर भारत में भी नैतिक और सामाजिक बहस तेज है। आलोचक इसे महिलाओं के शोषण के रूप में देख सकते हैं, खासकर निम्न आय वर्ग की महिलाओं के संदर्भ में। दूसरी ओर, समर्थक तर्क देते हैं कि यदि सरोगेट माँ स्वेच्छा से, विस्तृत कानूनी सुरक्षा और चिकित्सकीय निगरानी में शामिल होती है, तो यह एक पारस्परिक लाभदायक प्रक्रिया हो सकती है।
कानून में कड़े प्रावधान, चिकित्सकीय और कानूनी निगरानी तथा निष्पक्ष मुआवजा सुनिश्चित करते हैं कि प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के दुरुपयोग से बचा जा सके।
भारत में सरोगेसी की तुलना में अन्य अंतर्राष्ट्रीय विकल्प
भारत में कड़े नियमों के चलते कुछ दंपति अन्य देशों में सरोगेसी के विकल्प तलाशते हैं। हालाँकि, भारत में विकसित प्रौद्योगिकी, उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सुविधाएँ और व्यापक कानूनी सुरक्षा के कारण, योग्य भारतीय परिवार अब भी कई मामलों में सरोगेसी के लिए प्राथमिक विकल्प बने हुए हैं। नीचे कुछ देशों के उदाहरण दिए गए हैं:
- यूएसए:
- राज्यों के अनुसार नियम अलग-अलग हैं, लेकिन चिकित्सा गुणवत्ता उत्कृष्ट है।
- कानूनी प्रक्रियाएँ जटिल और महंगी हो सकती हैं।
- यूके:
- केवल निस्वार्थ सरोगेसी की अनुमति है, वाणिज्यिक सरोगेसी प्रतिबंधित।
- कानूनी प्रक्रियाएँ समय लेने वाली हैं।
- कैनाडा:
- केवल निस्वार्थ सरोगेसी की अनुमति है, जहां कानूनी सुरक्षा अच्छी है।
- सरोगेट माँ को केवल खर्चों का प्रतिपूर्ति मिलती है।
- रूस और यूक्रेन:
- वाणिज्यिक सरोगेसी उपलब्ध है, लेकिन कानूनी अनिश्चितताएँ हो सकती हैं।
- संभावित शोषण के मामलों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
हर देश की कानूनी और चिकित्सा व्यवस्था में अंतर है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय विकल्प चुनते समय विस्तृत शोध और कानूनी सलाह अनिवार्य है।
परिवार निर्माण के वैकल्पिक मार्ग
सरोगेसी के अलावा भी परिवार बढ़ाने के कई विकल्प उपलब्ध हैं:
- दत्तक ग्रहण: एक सुव्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया जिसके तहत बच्चे को स्थायी रूप से नए परिवार में शामिल किया जाता है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है, परंतु कानूनी रूप से सुरक्षित है।
- पालन-पोषण: ऐसे बच्चे जिन्हें अस्थायी या स्थायी रूप से अपने जैविक परिवार से अलग रखा जाता है। इसमें स्थानीय सामाजिक सेवाओं और संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय आवश्यक होता है।
- डॉनर द्वारा गर्भाधान: यदि जैविक अंडाणु या शुक्राणु से समस्या है, तो डोनर द्वारा सहायता ली जा सकती है। यह विकल्प सरोगेसी की तुलना में कम जटिल कानूनी प्रक्रियाओं के साथ हो सकता है।
अंतिम चयन व्यक्तिगत परिस्थितियों, कानूनी आवश्यकताओं और नैतिक मान्यताओं पर निर्भर करता है।
डोनर द्वारा गर्भाधान के विकल्प: RattleStork
भारत में कुछ प्लेटफ़ॉर्म, जैसे कि RattleStork, डोनर द्वारा गर्भाधान के विकल्प के रूप में लोकप्रिय होते जा रहे हैं। इच्छुक जोड़े या व्यक्ति इन प्लेटफ़ॉर्म पर निशुल्क रजिस्टर करके संभावित डोनरों के नेटवर्क से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष
सरोगेसी एक जटिल विषय है, जिसमें कानूनी, चिकित्सा और नैतिक प्रश्न एक साथ उठते हैं। भारत में सख्त कानूनों और परिवर्तित नीतियों के बावजूद, योग्य नागरिकों के लिए उपलब्ध विकल्पों में सावधानीपूर्वक चयन, पारदर्शी कानूनी प्रक्रिया और व्यापक चिकित्सकीय निगरानी महत्वपूर्ण हैं। सरोगेसी के माध्यम से परिवार बढ़ाने के निर्णय में सही एजेंसी का चयन, वित्तीय योजना और विशेषज्ञ कानूनी सलाह अनिवार्य है।